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पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह से आप क्या समझते हैं?| What do you understand by energy flow in an ecosystem?

 

पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह से आप क्या समझते हैं?| What do you understand by energy flow in an ecosystem?


 

पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह

 

उर्जा से पारिस्थितिकी तन्त्र संचालित होता है। समस्त जीव-जन्तु भोज्य पदार्थों के माध्यम से उर्जा प्राप्त करते हैं और अपने जीवन चक्र को पूर्ण करते हैं। पौधे एवं वृक्ष मिट्टी से खनिजों को ग्रहण करते हैं। तत्पश्चात् पौधें को भोजन के रूप में जीवधारी ग्रहण करते हैं और खनिज पदार्थों को जीव उर्जा की सहायता से रसायनों में बदल देते हैं। उर्जा प्रवाह एवं खनिज चक्र से पारिस्थितिकी तंत्र जीवन्त रहता है। उर्जा भोजन के माध्यम से एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर की ओर प्रवाहित होती है और इस प्रकार खनिज चक्रीय रूप से गतिमान रहता है। इस प्रकार पारिस्थितिकी की गत्यात्मकता को बनाये रखने में उर्जा प्रवाह एवं खनिज चक्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।


सूर्य उर्जा का मूल स्रोत है। सूर्य से विकरित  उर्जा से धरातल गर्म हो जाता है और धरातल ताप उर्जा का उत्सर्जन करता है। ताप उर्जा की दीर्घ तरंगों से वायुमंडल ताप युक्त हो जाता है। पौध सौर्य उर्जा ग्रहण कर प्रकाश संश्लेषण करते हैं जिससे रासायनिक उर्जा का जन्म होता है। उर्जा के अनेक रूप है परन्तु उसका स्रोत सूर्य ही है। वायुमण्डल तथा पृथ्वी संयुक्त रूप से उर्जा तंत्र का निर्माण करते हैं। उर्जा तंत्र पारिस्थितिकी को नियमित करता है।

पौधों द्वारा अवशोषित प्रकाश उर्जा रासायनिक उर्जा में रूपान्तरित हो कर खाद्य पदार्थों में इकट्ठी होती है।

 

कार्बनिक पदार्थों के आक्सीकरण से रासायनिक उर्जा गतिज उर्जा तथा ताप के रूप में अवमुक्त होती है। जैविक क्रियाओं का सम्पादन गतिज उर्जा के माध्यम से होता है।

 

ऊष्मा

जैविक क्रियाओं के सम्पन्न होने के उपरान्त गतिज उर्जा ताप के रूप में मुक्त होकर पर्यावरण में लौट जाती है। हरे पौधे संचित उर्जा का 90% हिस्सा अपनी जैविक क्रियाओं में व्यय करते हैं तथा उफर्जा को आहार के रूप में ग्रहण करने वाले शाकाहारी जीव-जन्तुओं को शेष 10% उर्जा स्थानान्तरित होती है। हर पोषण स्तर पर 90% उर्जा जैविक क्रियाओं में व्यय होती हैमात्रा 10% उर्जा ही उच्च श्रेणी की ओर अग्रसर होती है। इसीलिए प्राथमिक उपभोक्ताओं से उच्चतम उपभोक्ताओं की संख्या क्रमशः असमान होती है। जीवधारियों में उर्जा प्रवाह ऊष्मागतिक नियम के अनुरूप होता है।

सौर उर्जा पारिस्थितिकी तन्त्र के पोषण स्तर से होती हुई आकाश की ओर गमन कर जाती है तथा पुनः उस उर्जा की प्राप्ति किसी भी दशा में नहीं हो पाती। उष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार उर्जा न तो उत्पन्न होती है और न ही समाप्त। वस्तुतः उर्जा एक रूप से दूसरे रूपों में परिवर्तित होती जाती है।

पारिस्थितिकी तंत्र में उर्जा निवेश का उसी तंत्र से उर्जा के निर्गमन द्वारा सन्तुलन हो जाता है।

द्वितीय नियम के अनुसार जब पारिस्थितिकी तंत्र में कोई कार्य सम्पन्न होता हैतब उर्जा व्यय होती है। जब उर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती हैतब कार्य सम्पन्न होता है अर्थात् उर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। प्रकृति में उर्जा का विद्युतप्रकाशरासायनिकयांत्रिक एवं ताप के रूप में विसरण सम्पन्न होता रहता है। उर्जा का शत-प्रतिशत रूपान्तरण किसी भी दशा में सम्भव नहीं है। उर्जा का स्थानान्तरण खाद्य शृंखला के माध्यम से जीवधारियों में सम्पन्न होता है।

 

 

 

FAQ

 

पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह से आप क्या समझते हैं?

पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना में ऊर्जा का प्रवाह खाद्य श्रृंखला के निम्न स्तर से उच्च स्तर की ओर होता है। सजीवों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व जैव-पदार्थ तथा मृदा जैसे अजैविक घटकों में संचित होता है।

 

पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा कैसे प्रवाहित होती है?

सजीवों की विभिन्न आवश्यकताओं के लिए सूर्य के द्वारा प्रकाशिक ऊर्जा की नियमित आपूर्ति होती है। इस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का स्थानान्तरण चक्र (cycle) के रूप में न होकर एक सीधे रेखीय प्रवाह के रूप में होता है।

 

 

एक स्तर से दूसरे स्तर पर ऊर्जा प्रवाह क्या कहलाता है?

एक स्तर से दूसरे स्तर पर ऊर्जा प्रवाह खाद्य श्रृंखला कहलाती है।

 

 

ऊर्जा प्रवाह से आप क्या समझते हैं?

प्रत्येक पोषण स्तर पर स्थानान्तरण के समय ऊर्जा की हानि होती है। इसी कारण ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है। पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का स्थानान्तरण तथा प्रवाह एकदिशीय होता है तथा उसका चक्रण एवं पुनर्चक्रण नहीं होता है। पोषण श्रृंखला में कोई जीव उत्पादक स्तर के जितना करीब होगा उसे उतनी अधिक ऊर्जा उपलब्ध होगी।

 

 

ऊर्जा का 10 नियम क्या है?

दस प्रतिशत नियम का अर्थ है कि जब एक पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा एक ट्रोफिक स्तर से अगले तक पारित की जाती हैतो ऊर्जा का केवल दस प्रतिशत ही पारित किया जाएगा। एक ट्राफिक स्तर खाद्य श्रृंखला या ऊर्जा पिरामिड में जीव की स्थिति है

 

 

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