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पर्यावरणीय शिक्षा से आप क्या समझते है? इसके लाभ लिखिए? | Environmental Education

 

पर्यावरणीय शिक्षा से आप क्या समझते है? इसके लाभ लिखिए? | Environmental Education


पयार्वरणीय शिक्षा

भारत में पर्यावरण शिक्षा को प्रोत्साहन देते हेतु कई केन्द्र खोले गए हैं। यह पर्यावरण शिक्षा केन्द्र सी.पी.आर. शिक्षा केन्द्र अहमदाबाद एवं सी.पी.आर. शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु वर्ष 1978 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय की स्थापना की गई। यह पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं से संबंधित स्थाई प्रदर्शनीदीर्घ के अलावायह संग्रहालय स्कूली बच्चोंमहाविद्यालयों के छात्रों और आम जनता के लिए स्थायी प्रदर्शनी तथा की शैक्षिक कार्यक्रमों व गतिविध्यिं का भी आयोजन करता है। तीन क्षेत्राय प्राकृतिक संग्रहालय भुवनेश्वरभोपाल और मैसूर में स्थापित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त भारतीय वानिकी अनुसंधन एवं शिक्षा परिषद् देश में वानिकी शिक्षा के विस्तार एवं विकास गतिविधियाँ का केन्द्रीय स्थल हैंपर्यावरण शिक्षा लागू करने हेतु कई विनिमय होने के बावजूद कोई विशेष प्रतिफल देखने को नहीं मिले हैं। वस्तुतः कई राज्य सरकारें इस मामले में उदासीन हैं।

 

 

पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता क्यों?

1. पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना तथा जन-चेतना बढ़ाना ही पर्यावरण शिक्षा का निहितार्थ है।

2. पिछले पाँच दशकों में यह अनवरत देखा गया है कि पृथ्वी की जीवन रक्षक क्षमता को तीव्र गति से ह्नास हो गया है। इस ह्रास का मुख्य कारण वनों का मानव विकास की दृष्टि से नाशप्रजातियों का विलुप्त होना और जलमृदा एवं वायु का प्रदूषण है।

3. बढ़ती आबादी से भू-भाग और अन्य संसाधन सिमटकर छोटे होते जा रहे हैं। वायुमंडल से हानिकारक या विषैली गैसों में अनवरत वृद्धि जारी है जिसका दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर देखा जा सकता है।

4. बड़े-बड़े उद्योगों की स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर जंगल काटे जा रहे हैं। देश में अनवरत बढ़ती आबादी के लिए भोजन तथा आवास की समस्या हल करने के उद्देश्य से बड़ी मात्रा में जंगलों का सपफाया किया गया।

5. चारागाह के रूप में वन क्षेत्रों का अनियंत्रित उपयोग तथा वन्य प्राणियों के शारीरिक अवशेष इकट्ठा करने हेतु उनका अवैध शिकार अपनी गति से जारी है। वनों में विभिन्न प्रकार की वनोपज प्राप्त करने के लिए ठेकेदारों ने भी वनों को नष्ट किया है।

6. आदिम जातियों की झूम कृषि प्रणाली भी जंगलों के विनाश में प्रमुख भूमिका निभाती है।

7. हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जलवायु की शुद्धता और आस-पास के वातावरण की स्वच्छता पर निर्भर करता है किन्तु औद्योगीकरण की तीव्र प्रक्रिया हो रही है जिनमें उद्योगों से उत्सर्जित जहरीली गैसेवाहनों का धुआं प्रमुख है। इसके परिणाम स्वरूप आँखों में जलनफैफड़ों में कैंसरदमा जैसी खतरनाक बीमारियाँ आम हो गई है।

8. उद्योगों द्वारा विसर्जित अवशिष्ट पदार्थ के जल स्त्रोतो से मिलने से जल स्त्रोत रोग ग्रस्त होते है।

9. रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशक दवाइयों के बढ़ते प्रयोगकल-कारखानों का कचराभूमि में आसानी से न विघटित होने वाली पॉलिथीनप्लास्टिक के टुकड़ेकाँच एवं अन्य जहरीले तत्वों से भूमि प्रदूषित हो रही है।

वस्तुतः इन सबके के पीछे पर्यावरण संरक्षण के बारे में लोगों में अज्ञानता है। इस अज्ञानता को दूर करने के लिए पर्यावरण शिक्षा जरूरी है।

 

भारत में पर्यावरण शिक्षा की समस्याएं

सर्वोच्च न्यायालय ने कक्षा-12 तक पर्यावरण शिक्षा लागू करना अनिवार्य कर दिया है। किन्तु बहुत सारे राज्यों ने इसे लागू नहीं किया है। वस्तुतः पर्यावरण के शैक्षिक पाठ्यक्रम लागू करने के संबंध में विवाद है। कुछ शिक्षाविदों ने इसकी उपयोगिता पर प्रश्न-चिन्ह् खड़ा कर दिया है। उनके मतानुसार पहले से ही बच्चों का पाठ्यक्रम बोझिल है। पर्यावरण शिक्षा लागू होने से बच्चें पर अतिरिक्त दबाव आ जायेगा। पर्यावरण शिक्षा शैक्षिक विभागों या शिक्षकों के लिए प्राथमिकता नहीं रखता है। बहुत से शिक्षकों के लिए पर्यावरण शिक्षा विज्ञान से जुड़ा विषय है।

वे यह नहीं सोचते कि इसे मानविकीकला या अन्य दूसरे तरीकें से पढ़ाया जा सकता है। शिक्षाविदों का मानना है कि इसे पाठ्यक्रम में न जोड़कर स्वैच्छिक स्तर पर स्कूली या महाविद्यालय शिक्षा में सम्मिलित किया जाना चाहिए। यह पाठ्येत्तर विषय होना चाहिए जिसमें छात्रों को पारिस्थितिकीय के प्रति अभिरूचि और जागरूकता पैदा करने पर बल दिया जाना चाहिए। जहाँ पर्यावरण शिक्षा की पढ़ाई होती है। वहाँ पारिस्थितिकीय अध्ययन पर कम पेड़-पौधें व बाघ के बारे में अधिक बताया जाता है।

पर्यावरण शिक्षा संबंधी अन्य समस्याएँ यह है कि इसके पाठ्यक्रम किसी एक संस्था द्वारा तय किये जाते है और यह भारत के सभी भागों में लागू की जाती हैकिन्तु भारत के विभिन्न क्षेत्रों की अपनी-अपनी पर्यावरणीय समस्याएँ हैजिस प्रकार कुपोषण की पारिस्थितिकी प्रणाली में निवास करने वाले लोगों को मरूस्थल के बारे में पढ़ाने से कोई विशेष उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकती। वास्तव में पर्यावरण शिक्षा की समस्याओं का समाधान उस समय तक संभव नहीं है जब तक इस आधुनिक जगत का शिक्षित समुदाय इसे शिक्षा का विषय की बजाय जीवनशैली का विश्व नहीं मानेंगे। सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ व्यक्ति विशेष को अपने स्तर पर पहल करनी होगी आज गरीबीबेरोजगारीआतंकवादजातिवादराजनैतिक विवाद इत्यादि किसी देशप्रदेश या क्षेत्र विशेष की समस्याएं है

जबकि भू-मंडलीय तापन के कारण जलवायु परितर्वनप्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता एवं वृद्धि जैसी विश्वव्यापी समस्याएँ उत्पन्न होती जा रही है।

 

 

FAQ

 

 

पर्यावरणीय शिक्षा से आप क्या समझते है?

पर्यावरणीय शिक्षा (Environmental Education) शिक्षा का ही एक भाग है। यह वह शिक्षा हैजिसमे छात्र अपने आस-पास दिखने वाले विभिन्न प्रकार की वस्तुओंजीवों-अजीवो के संबंध में अध्ययन करते हैं। पर्यावरणीय शिक्षाशिक्षा की एक महत्वपूर्ण इकाई हैक्योंकि इसी के अंतर्गत छात्रों को वास्तविक शिक्षा प्रदान की जाती हैं।

 

 

पर्यावरण में शिक्षा का क्या महत्व है समझाइए?

पर्यावरण शिक्षा एक पुनीत कार्य हैजिसे करके एवं उसके मार्ग पर चलकर वर्तमान के साथ भविष्य को सुंदर बना सकते हैंमानव की अनेक त्रासदियों से रक्षा कर सकते हैंप्राकृतिक आपदाओं को कम कर सकते हैंविलुप्त होते जीव-जंतुओं व पादपों की प्रजातियों की रक्षा कर सकते हैं और जलवायु एवं भूमि को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं.

 

पर्यावरण शिक्षा क्या है इसके लाभ लिखिए?

पर्यावरण शिक्षा अधिगम की एक प्रक्रिया है जो पर्यावरण व इससे जुड़ी चुनौतियों के सम्बन्ध में लोगों की जानकारी और जागरूकता को बढ़ाती हैंचुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक कुशलताओं व प्रवीणता को विकसित करती हैं

 

 

पर्यावरण से आप क्या समझते हैं पर्यावरण के महत्व?

पर्यावरण (अंग्रेज़ी: Environment) शब्द का निर्माण दो शब्दों से मिल कर हुआ है। पर्यावरण वह है जो कि प्रत्येक जीव के साथ जुड़ा हुआ है हमारे चारों तरफ़ वह हमेशा व्याप्त होता है। सामान्य अर्थों में यह हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक तत्वोंतथ्योंप्रक्रियाओं और घटनाओं के समुच्चय से निर्मित इकाई है।

 

 

पर्यावरण जागरूकता में शिक्षक की क्या भूमिका है?

पर्यावरण-संरक्षण के लिये शिक्षक की भूमिका- वैकल्पिक ऊर्जा के साधनों का उपयोग एवं उनका प्रचार-प्रसार करना। धूम्र रहित चूल्हे का उपयोग करना सिखाना। ध्वनि प्रसारकों जैसे रेडियोटी. वी.टेप आदि की आवाज की अपने कमरे तक ही सीमित रखना।

 

 

पर्यावरण शिक्षा क्या है माध्यमिक स्तर पर इसकी शिक्षा के उद्देश्यों की विवेचना कीजिए?

मुख्य लक्ष्य हैंबच्चों को पर्यावरण के प्रति सजग और संवेदनशील बनाना । उचित प्रकार से संवेदित और संस्कारित पीढ़ी के हाथों में ही निश्चित होकर भविष्य की विरासत दी जा सकती है तथा आशा की जा सकती है कि ऐसी पीढ़ी ही उस विरासत की रक्षा और संवर्धन कर सकेगी।

 

 

पर्यावरण के संरक्षण एवं जागरूकता में शिक्षा की क्या भूमिका है?

इसके द्वारा शिक्षक पर्यावरण के संरक्षणस्वच्छतापोषण तथा स्वास्थ्य सबंधी ज्ञान मिलता है।  इस प्रकार शिक्षक एक कुम्हार के समान होता है जिसके द्वारा समाज एवं राष्ट्र के भावी कर्णधारों का निर्माण होता है। अतः शिक्षक पर्यावरण के प्रसार में प्रभावी एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

 

पर्यावरण शिक्षा के क्या उद्देश्य हैं?

(1) प्रकृति प्रेम की भावना का विकास करना।

(2) पर्यावरण के प्रति संचेतना एवं वैज्ञानिक सोच का विकास करना।

(3) देश के भावी नागरिकों को यह एहसास दिलाना कि पर्यावरण से सिर्फ वे ही नहीं जुड़े हैं उनक आने वाली संततियाँ भी इसी पर्यावरण का उपयोग करेंगी।

(4) पर्यावरणीय घटकों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का विकास करना।

 

 

 

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