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लार्ड वेलेजली की सहायक संधि का उल्लेख कीजिए | Lord Vailejali Sahayak Sandhi

 

वेलेजली की सहायक संधि प्रणाली

लॉर्ड वेलेजली कंपनी को भारत की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता थालेकिन इसमें मुख्य अवरोध फ्रांसीसियों का बढ़ता प्रभुत्व था। अतः इसका उद्देश्य फ्रांसीसियों के बढ़ते प्रभाव को भी नष्ट करना था। वेलेजली की यह साम्राज्यवादी योजना सहायक संधि के रूप में सामने आयी। फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले ने सर्वप्रथम सहायक संधि प्रणाली का प्रयोग करते हुए भारतीय नरेशों को सहायता देने व बदले में उनसे धन लेने की शुरूआत की थी। परंतु सहायक संधि की व्यापकता वेलेजली के काल में उस समय देखने को मिलीजब उसने इसे अंग्रेजी राज्य के विस्तार का साधन बनाया।


सहायक संधि का क्रियान्वयन

1. निजाम 1798 ई.

2. मैसूर 1799 ई.

3. अवध 1801 ई.

4. भोंसले 1803 ई.

5. पेशवा 1804 ई.

6. बाद में कर्नाटकतंजौरसुरत आदि राज्यों को भी कुशासन के आधार पर कंपनी के अधीन ले लिया गया।

 

सहायक संधि की विशेषता

देशी रियासतों की रक्षा के लिए कंपनी वहां अंग्रेजी सेना रखेगीजिसका खर्च उस रियासत को ही उठाना पड़ेगा। नकद धनराशि या राज्य का कुछ इलाका सेना के खर्च के लिए कंपनी को सौंपना होगा। वह देशी रियासत जो संधि स्वीकार करेगीकंपनी की स्वीकृति के बिना अपने राज्य में शत्रु राज्य के व्यक्ति को शरण या नौकरी नहीं देगी। देशी रियासतें शासन प्रबंधन के लिए अपने दरबार में एक ब्रिटिश रेजिडेंट रखेंगी। भारतीय नरेशों के आन्तरिक शासन में कोई हस्तक्षेप नही किया जाएगा।


सहायक संधि से ईस्ट इण्डिया कंपनी को लाभ

1. देशी रियासतों से फांसीसियों का प्रभाव पूर्णतः समाप्त हो गया क्योंकि फ्रांसीसियों को वहां नौकरी करने का अवसर प्राप्त नहीं हो सकता थाजो राज्य या क्षेत्र में सहायक संधि के अंतर्गत आ जाता था।

2. चूंकि देशी रियासतों की विदेश नीति अब कंपनी के हाथ में चली गई थीअतः कंपनी द्वारा वे एक-दूसरे से पृथक् कर दी गई और इस प्रकार वे अंग्रेजों के विरुद्ध गुट या संघ बनाने से वंचित हो गई।

3. देशी राज्यों के खर्च पर ही अंग्रेजों की सेना बनकर तैयार हो गई।

4. वह सेनाजो देशी रियासतों की रक्षा के लिए बनायी गई थीव्यवहारतः कंपनी द्वारा अपने शत्रुओं और देशी रियासतों को नष्ट करने में उपयोग की जाती थी।

5. इससे कंपनी की साम्राज्यवादी सीमाएँ काफी आगे बढ़ गई।

6. इस संधि के द्वारा देशी राज्य कंपनी का संरक्षण स्वीकार कर संतुष्ट हो गएजिससे कंपनी के विरुद्ध बढ़ते विद्वेष एवं शत्राता की भावना को नियंत्रित करने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई।

 

सहायक संधि का देशी रियासतों पर प्रभाव

यद्यपि अंग्रेज रेजिडेंटों को राज्यों आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं थाफिर भी प्रायः वे इसका उल्लंघन करते थे। परिणामस्वरूपशासकों ने शासन का भार धीरे-धीरे रेजिडेन्टों को ही सुपुर्द कर दिया। विदेश नीति के मामलों में कंपनी की सर्वोच्चता स्वीकार कर देशी रियासतें अपनी स्वतंत्रत के साथ समझौता कर बैठीं।

सेना पर अत्यधिक व्यय होने के कारण देशी रियासतों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई। वे सेना का खर्च उठाने में असमर्थ सिद्ध होने लगींजिसका परिणाम यह हुआ कि देशीरियासतों को अपने बहुत बड़े प्रदेश से हाथ धोना पड़ा। इस संधि के माध्यम से भारतीय नरेशों की राष्ट्रीय भावनासाहससैन्य संगठन आदि का अस्तित्व समाप्त हो गयाजिसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय राज्य निरंतर पतन की ओर अग्रसर होते गये।



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