About Me

header ads

चक्रवात और तूफान | cyclone and storm

 

चक्रवात और तूफान | cyclone and storm


चक्रवात और तूफान

 

पूर्व और पश्चिम में 8000 किमी से अधिक की तटीय सीमा तीव्र चक्रवातों और मानसून के पूर्व और पश्चात् सम्बद्ध तूफान और भारी वर्षा के खतरों का सामना करती है। मानसून-पूर्व चक्रवात संख्याओं और तीव्रता दोनों में प्रायः अधिक तीव्र होते हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि चक्रवाती तूफानों के 58 प्रतिशत से अधिकजो बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैंअक्तूबर और नवम्बर में पूर्वी तट के समीप पहुंचता अथवा उसे पार करते हैं। अरब सागर पर जो तूफान उत्पन्न होते हैं उनका केवल 25 प्रतिशत ही पश्चिमी तट को प्रभावित करता है। मानसून-पूर्व मौसम में समतुल्य आंकड़े अरब सागर में 25 प्रतिशत और बंगाल की खाड़ी में 30 प्रतिशत है।


महा चक्रवात जिसने दिनांक 29 अक्तूबर 1999 को उड़ीसा के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया कि अगले तीन दिनों तक भारी वर्षा के साथ 270-300 कि.मी. प्रति घंटे की वायु गति थी। तट को प्रभावित करने वाली समुद्र की तरंगें 7 मीटर ऊंची थीं। इस महाचक्रवात ने लगभग 10,000 लोगों और लाखों पशुधन को मौत के घाट उतारते हुए अत्यधिक क्षति पहुंचाई। 2 मिलियन से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। अर्थव्यवस्थाअवसंरचना और पर्यावरण का नाश हुआ था।

 

चक्रवातभारत के संदर्भ में

भारत में मुख्यतः उष्ण कटिबंधीय चक्रवात आते हैं। अभी वरदा चक्रवात ने भारत के पूर्वी तट पर बहुत नुकसान पहुंचाया था। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चक्रवात वरदा की वजह से कई लोगों की मौत हो गई। कई जगहों पर भारी पेड़ सड़कों पर गिर गए और बिजली आपूर्ति बंद हो गई। दोनों ही प्रदेशों के तटीय इलाकों मेंभारी बारिश हुई और कई जगह तूफान की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। वरदा अरबी भाषा का शब्द हैजिसका मतलब होता है गुलाब। 11 मई 2016 को रोआनू चक्रवात श्रीलंका और भारत से होते हुए बांग्लादेश में पहुंचाजिसके कारण बांग्लादेश के कई तटीय इलाकों में बाढ़ के हालात बन गए तथा कई इलाकों में जमीनें धंस गयी। इसके पहले 2014 में हुदहुद चक्रवात ने भारत के पूर्वी तट पर तबाही मचायी थी और इसके कारण लगभग 1.63 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। दुनिया में चक्रवातों से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों में भारत भी है। विशेषकर भारत का पूर्वी तट लगातार इनकी विभीषिका का शिकार होता रहता है। साइक्लोन जेनीसिसचक्रवात गठन और उत्पत्ति की प्रक्रिया के बारे में बताता है।

 

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात एक तूफान प्रणाली हैजो एक विशाल निम्न दबाव केंद्र और भारी तड़ित-झंझावातों द्वारा निर्मित होती है और जो तीव्र हवाओं और घनघोर वर्षा को उत्पन्न करती है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति तब होती है जब नम हवा के उपर उठने से गर्मी पैदा होती हैजिसके फलस्वरूप नम हवा में निहित जलवाष्प का संघनन होता है। वे अन्य चक्रवात आंधियों जैस नर्वेस्टरयूरोपीय आंधियों और धु्रवीय निम्न आंधियों की तुलना में विभिन्न ताप तंत्रों द्वारा उत्पादित होते हैं।

उष्ण कटिबंधीय शब्द इन प्रणालियों के भौगोलिक मूलजो लगभग अनन्य रूप से दुनिया भर में उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में बनती है और समुद्र तटीय उष्ण कटिबंधीय एयर मासेज में उनका निर्माणदोनों का उल्लेख करती है। चक्रवात शब्द ऐसे आंधियों के चक्रवाती स्वभाव का उल्लेख करता हैजो उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त घूमता है और दक्षिणी गोलार्द्ध में वामावर्त घूमता है। अपने स्थान और शक्ति के आधार परएक उष्ण कटिबंधीय चक्रवात को अलग-अलग नामों से जाना जाता है,

जैसे हरिकेनटाइफूनट्रोपिकल स्टॉर्मसाइक्लोनिक स्टॉर्मट्रॉपिकल डिप्रेशनऔर केवल साइक्लोन। इसकी चौड़ाई सौ मीटर हो सकती है।

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात के केंद्र में वायु भार सबसे कम होता है। इस भाग को चक्रवात की आंख कहते हैं। इसका व्यास 5 से 50 किमी तक होता है। इसके केंद्र में मामूली हवा चलती है या वातावरण शांत रहता है। इस भाग का तापमान भी ज्यादा होता है जबकि इसके बाहरी भाग में घने काले बादल रहते हैं तथा हवा तीव्र गति से घूमती रहती है जिसके कारण इसे चक्रवात कहते हैं। इसकी सतत गति 100-120 किमी प्रति घंटा होती है जो बढ़कर 150-200 किमी प्रतिघंटा से भी अधिक हो सकती है जैसे हुदहुद चक्रवता की गति 215 किमी प्रतिघंटे तक पहुंच गयी थी। चक्रवातों के बाहरी भाग में इनका निर्माण अकसर महाद्वीप के पूर्वी तट पर ज्यादा होता है। उदाहरणस्वरूप बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की तुलना में ज्यादा चक्रवात बनते हैं। ये चक्रवात सामान्यतः बेहद ताकतवर होते हैं जिनसे बड़े पैमाने पर  विनाश होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु से आने वाली विपदाओं में चक्रवात सबसे ज्यादा विनाशकारी होते हैं। ये जहां से गुजरते हैं वहां के बहुत से ढांचों को ध्वस्त कर देते हैंबिजली की लाइनें टूट जाती हैंसड़कें टूट जाती हैंवृक्ष उखड़ जाते हैं। ऐसी हालत में इसके गुजरने के बाद सबसे पहले उस क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य चलाया जाता है। साथ ही तीव्र वर्षा के कारण उस क्षेत्र में महामारी का खतरा भी आ सकता है अतः उसका निराकरण किया जाता है। चूंकि इनका निर्माण समुद्र में होता है और वहां से ये भूमि की तरफ बढ़ते हैं तो इनके आगमन की पूर्व सूचना आसानी से उपलब्ध करायी जा सकती है और ज्यादा प्रभावित होने वाले इलाकों को जीवन की क्षति से बचाया जा सकता है।

 

चक्रवात आने से पूर्व का बचाव

1. सक्षम चक्रवात पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाएं

2. सरकारी एजेंसियों विशेषकर पत्तनमत्सयपालन और नौवहन जैसे समुद्री हितों और सामान्य जनता को चेतावनी के तीव्र प्रसार

3. असुरक्षित क्षेत्रों में चक्रवात आश्रय स्थलों के निर्माण

4. लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में निष्कासन के लिए तैयार तंत्र

5. आपात्स्थितियों का सामना करने के लिए सभी स्तरों पर समुदाय की तैयारी की अपेक्षा होती है

6. ऐसे मकानों का निर्माण करना चाहिए जो तीव्र हवाओं और वर्षा से सुरक्षित हों

7. बाढ़ के सही प्रबंधन के लिए चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में वाहिकाओं के निर्माण होने चाहिए

8. तटवर्ती क्षेत्रों में गहरे जड़ों वाले और सुई के समान पत्तिया वाले पेड़ों की कतार लगाना भी लाभप्रद है इसके अतिरिक्त ज्वारीय वन वृक्ष भी लगाए जा सकते हैंइन्हें तटवर्ती आश्रय पट्टी कहा जाता है।

 

चक्रवात आने के पश्चात् बचाव एवं पुनर्वास

चक्रवात आने के बाद बाढ़ और महामारी की समस्या से निबटने के उपाय किए जा सकते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने आपदा चेतावनी प्रणाली का विकास किया है। यह उपग्रहों के द्वारा चक्रवातों पर चेतावनी देता है

 

चक्रवात आश्रयस्थल

चक्रवात के दौरान मानव जीवन को पहुंचने वाली क्षति कम करने के सर्वाधिक सफल तरीकों में से एक चक्रवात आश्रयस्थलों का प्रावधान है। घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों जहां बड़े पैमाने पर लोगों का निष्कासन व्यवहार्य नहीं हैमें सार्वजनिक भवनों का प्रयोग चक्रवात आश्रयस्थल के रूप में किया जा सकता है। ऐसी भवनों की डिजाइन इस प्रकार बनाई जा सकती है कि उसमें विद्यमान वायु की दिशा में द्वार की न्यूनतम संख्या सहित रिक्त पुरोभाग की व्यवस्था हो। भवन के छोटे किनारे को तूफान का सामना करना चाहिए ताकि कम वायु-प्रतिरोध करना पड़े। तूफान के प्रभाव को कम करने के लिए इन भवनों के सामने मिट्टी की पट्टियां और हरित क्षेत्रों का प्रयोग किया जा सकता है।

 

केस अध्ययन

वरदाः बेहिसाब नुकसान

चेन्नई में वरदा चक्रवाती तूफान ने कुछ ही घंटों में भयंकर कहर बरपाया। मौसम विभाग ने अपने अंतिम प्रतिवेदन में कहा कि तूफान जब तटीय इलाकों से टकराया तो उस वक्त हवाएं 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलीं। इसका असर कई घंटों तक रहा। उद्योग संगठन एसोचैम ने इस तूफान से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुल नुकसान एक बिलियन डॉलर (6749 करोड़) हुआ है। एक साल पहले आयी भयंकर बाढ़ के बाद ये दूसरी प्राकृतिक आपदा थी जिससे स्थानीय लोगों को निपटना पड़ा। एसौमैच ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘तूफान में कृषि क्षेत्र को काफी नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान केले और पपीता के बागानों और धान की फसलों को हुआ है जिससे एक बिलियन डॉलर तक का नुकसान हुआ है।’ मछली पालन से लेकर पशुपालनट्रेन से लेकर हवाई सेवाएं प्रभावित हुईंजिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ा है। पर्यटन उद्योग पर भी कुछ दिन तक असर रहेगा।

 

समुद्री तूफान/चक्रवात में ड्रोन के अनुप्रयोग

कई देशों में उष्णकटिबंधीय समुद्री तूफानचक्रवात का खतरा भी हमेशा बना रहता है। ये प्राकृतिक आपदाएँ प्रशांत महासागरअटलांटिक महासागरकैरेबियन सागरमेक्सिको की खाड़ी आदि के तटीय क्षेत्रां में प्रतिवर्ष होती है। इनमें से कई श्रेणी एवं के होते हैं जिनसे इन महासागरों के तटीय क्षेत्रों में अकल्पनीय तबाही होती है। विगत वर्षों में गोन्जालोजोक्विनआइरिसमिआमीचार्लीमैथ्यूकैट्रीनानिकोली आदि ने तटीय राज्यों/शहरों में जबरदस्त हानि पहुँचायी है। इनमें से कुछ तूफानों/चक्रवातों का ड्रोन्स के माध्यम से भी अध्ययन किया गया है जिससे प्रभावितों को अधिकाधिक मदद मिली। अक्टूबर 2016 में समुद्री तूफान मैथ्यू से अमेरिका के फ्लोरिडा एवं हैती में जान-माल का भयंकरतम नुकसान हुआ। चक्रवात कुक ने अप्रैल 2017 में न्यूजीलैंड को भी अत्यधिक प्रभावित किया है।

 

 

FAQ

 

 

चक्रवात क्या है विस्तार से समझाइए?

कम वायुमंडलीय दवाब के चारों ओर गर्म हवा की तेज आंधी को चक्रवात कहते हैं. दक्षिणी गोलार्ध में इन गर्म हवा को चक्रवात के नाम से जानते हैं और ये घड़ी की सुई के साथ चलते हैं. उत्तरी गोलार्ध में इन गर्म हवा को हरीकेन या टाइफून कहते हैं. ये घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में चलते हैं

 

 

तूफान कितने प्रकार के होते हैं?

चक्रवातों के छह मुख्य प्रकार हैं: ध्रुवीय चक्रवातध्रुवीय कमअत्तिरिक्त उष्ण कटिबंधीय चक्रवातअंत:उष्ण कटिबंधीय चक्रवातउष्णकटिबंधीय चक्रवात और मेसोसाईंक्लोनेस .

•          ध्रुवीय चक्रवात

•          ध्रुवीय कम

•          आतिरिक्त ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात

•          अन्त: ऊष्ण कटिबंधीय

•          उष्णकटिबंधीय

•          मेसोस्कैल

 

भारत में चक्रवात को क्या कहते हैं?

चक्रवात को अंग्रेजी में साइक्लोन कहते हैं। इसकी संरचना अंग्रेजी के अक्षर जैसी होती है। चक्रवात एक ऐसी संरचना है जो गर्म हवा के चारों ओर कम वायुमंडलीय दाब के साथ उत्पन्न होती है।

 

 

चक्रवात क्या है UPSC?

कम वायुमंडलीय दवाब के चारों-ओर गर्म हवा की तेज आंधी को चक्रवात कहते हैं। दक्षिणी गोलार्ध में ये घड़ी की सुई के साथ चलते हैं तथा उत्तरी गोलार्ध में ये घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में चलते हैं। चक्रवात दो प्रकार के होते हैं- ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात तथा शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात।

 

 

तूफान का नाम कैसे पड़ता है?

कैसे होता है तूफानों का नामकरण

किसी भी साइक्लोन के नामकरण के लिए सदस्य देश अपनी ओर से नामों की सूची देते हैं. इसके बाद उनकी अल्फाबेटिकल लिस्टिंग की जाती है. उसी क्रम में सुझाए गए नाम पर तूफानी चक्रवातों का नामकरण किया जाता है

 

 

टाइफून चक्रवात कहाँ आता है?

दक्षिणी चीन सागर पर बना टायफून इंफा चक्रवाती तूफान दक्षिण पश्चिम मानसून को प्रभावित कर सकता है। अभी तक यह नहीं हो पाया है कि वह देश के उत्तरी राज्यों में मानसून पर कितना असर डालेगा लेकिन इसे मौसम के प्रतिकूल बताया गया है।

 

हरिकेन कहाँ का चक्रवात है?

इरमा हरीकेन (Hurricane Irma) एगो बहुत पावरफुल उष्णकटिबंधी चक्रवात बा जे अटलांटिक महासागर के कैरीबियन इलाका में लीवर्ड दीपआ प्यूर्टो रिकोक्यूबा आ फ्लोरिडा के आपना जद में लिहले बा।

 

चक्रवात के केंद्र को क्या कहते हैं?

सबसे कम वायुमंडलीय दबाव वाला क्षेत्र चक्रवात का केंद्र होता है. इसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में Cyclone Eye के रूप में भी जाना जाता है

 

प्रतिचक्रवात कैसे बनता है?

प्रतिचक्रवात के केंद्रीय भाग में हवाएं ऊपर से नीचे उतरती हैं जिसके कारण इसके मध्यवर्ती भाग में मौसम स्वच्छ रहता है। प्रतिचक्रवात मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं उष्ण प्रतिचक्रवात और शीतल प्रतिचक्रवात। उष्ण प्रतिचक्रवात उपोष्ण उच्चदाब पेटी में उत्पन्न होते हैं जहाँ हवाओं का अपसरण (divergence) होता है।

 

चक्रवात से बचने के लिए क्या क्या उपाय हो सकते हैं?

1.         जब तक आपको घर लौटने के लिए सूचित नहीं किया जाए तब तक आश्रय स्थल पर ही रहें।

2.         आप रोगों के खिलाफ टीकाकरण तुरंत करा लेना चाहिए।

3.         रोशनी के खम्भों से झूलते या ढीले तारों से कड़ाई से बचें।

4.         यदि आप वाहन चला रहे हों तो सावधानीपूर्वक चलाएं।

5.         अपने परिसर से मलबा तुरंत साफ करें।

6.         उपयुक्त अधिकारियों को नुकसान की सही जानकारी दें।

 

दोस्तों हमें कमेन्ट के ज़रिए बतायें कि आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगायदि अच्छा लगा हो तो आप इसे सोशल मीडिया पर अवश्य शेयर करें यदि इससे सम्बंधित कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेन्ट करके हमसे पूंछ सकते है धन्यबाद !



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ